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आठ विद्यालयों के खिलाफ लग सकता है 5 लाख का अर्थदंड

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लखनऊ। वैसे तो राजधानी के अधिकतर स्कूल अभिभावकों को खुले आम लूट रहे हैं लेकिन शिकायत करने कोई सामने नहीं आया, ऐसी स्थिति में बहुत सारे स्कूल बचे हुए हैं। हिंदी दैनिक लोकभारती के अभियान के चलते पिछले दिनों कुछ स्कूल के अभिभावक सामने आए, इनमें से आठ विद्यालयों में
शिकायतें सही पाई गई हैं, अब जिलाधिकारी की कमेटी ने उनसे पूछा है कि क्यों ना आपके ऊपर 5 लाख का र्जुमाना लगा दिया जाए?
जिलाधिकारी लखनऊ विशाख जी. की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 एवं संशोधन अधिनियम, 2020 के प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना था। बैठक में जिला शुल्क नियामक समिति द्वारा अधिनियम की धारा-8 के अंतर्गत की गई जांच संबंधी रिपोर्ट जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई। समिति की रिपोर्ट के अनुसार जनपद के कुल 20 विद्यालयों के विरुद्ध 28 शिकायतें मिली थीं। प्राप्त शिकायतों की जांचोपरांत कुल 8 शिकायतें सही पाई गईं। इनमें से 2 विद्यालयों ने अपनी त्रुटि मानते हुए फीस वृद्धि का समायोजन आगामी माह में किए जाने का आश्वासन दिया है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिन 8 विद्यालयों के विरुद्ध शिकायतें सही पाई गई हैं, उन्हें उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के संबंध में इस आशय का नोटिस जारी किया जाए कि क्यों न उनके विरुद्ध 5 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया जाए। संबंधित विद्यालयों को एक जून 2026 तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। इन आठ स्कूलों में वृंदावन सेक्टर 6 स्थित एलन हाउस पब्लिक स्कूल, सीलवती आइडियल पब्लिक स्कूल, रामनगर, कृष्णानगर स्थित आश्रम एकेडमी, इंदिरानगर स्थित हुकुम सिंह मेमोरियल इंटर कॉलेज, सेंट डोमिनिक इंटर कॉलेज, गोयल कैम्पस, अयोध्या रोड का सेठ एम.आर.जयपुरिया 
7 ब्राइट वे इंटर कॉलेज, सेक्टर-एच, जानकीपुरम, के अलावा के.जे.मॉडर्न पब्लिक स्कूल भी शामिल है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, उत्तरदायी एवं अभिभावक हितैषी बनाए रखने हेतु शुल्क विनियमन अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। किसी भी विद्यालय द्वारा मनमानी शुल्क वृद्धि अथवा नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।


 नाम बड़े और दर्शन छोटे जैसे हैं स्कूल 

लखनऊ। लाखों रुपए की जमीन खरीद कर करोड़ों रुपए खर्च करके स्कूल की बिल्डिंग बनाने वाले मालिक समाजसेवा का ढोंग तो करते हैं लेकिन दरअसल यह अभिभावकों को लूटने के लिए सारा कुचक्र रचते हैं। यही कारण है कि गोयल कैम्पस स्थित सेठ एम.आर.जयपुरिया ने लाखों रुपए की फ्रेंचाइजी लेकर अभिभावकों को कमीशनखोरी की किताबें खरीदने पर मजबूर कर रखा है। यही नहीं यूनिफॉर्म और मोजा-जूता भी अपने वेंडर से ही खरीदवा रहे हैं। और तो और अपने स्कूल में रखी शिक्षकों को कम से कम वेतन में देकर काम चला रहे हैं, और नियुक्त प्रिंसिपल की एजुकेशन क्वालीफिकेशन ही कम है। ऐसे में खर्च कम और वसूली ज्यादा का खेल सेठ एम.आर.जयपुरिया का सूत्र वाक्य बन गया है। कुछ इसी तरह वृंदावन सेक्टर-6 स्थित एलेन पब्लिक स्कूल का भी है। जूता और चमड़े का कारोबार करने वाली कानपुर के सुपर हाउस के मालिक मुख्तारूल अमीन का यह स्कूल इस बात के लिए विख्यात ज्यादा है कि टीचर्स और प्रिंसिपल हर महीने बदल जाती हैं। कम वेतन और ज्यादा समय तक स्कूल में बैठाए रखने की मजबूरी के चलते कर्मचारी भाग खड़े होते हैं। पिछले दो-तीन महीने से प्रिंसिपल का काम जेबा संभाल रही है। स्कूल मालिक मुख्तारूल अमीन के पास राजधानी के शहीद पथ स्थित एक स्कूल को छोड़कर सभी दिल्ली पब्लिक स्कूल की फ्रेंचाइजी भी है। पिछले दिनों स्कूल में एक 4 साल की बच्ची के साथ पोक्सो एक्ट की घटना हुई थी, जिसमें स्कूल के तीन कर्मचारी महीनों तक जेल में बंद रहे। स्कूल में एक समुदाय के ही कर्मचारी और टीचर्स ज्यादा रखने के चलते ही लोग स्कूल पसंद नहीं करते। कुछ ऐसा ही हाल दैनिक जागरण के पूर्व पत्रकार रहे प्रेम सिंह का भी है, इन्होंने ब्राइट वे स्कूल के नाम से राजधानी में चार ब्रांच खोल रखी हैं। पिछले दिनों अभिभावकों ने फीस बढ़ोतरी और उस हिसाब से सुविधा न देने, महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने की शिकायत की थी, जिलाधिकारी की कमेटी की जांच में सही पाए जाने के बाद प्रेम सिंह बैकफुट पर आ गए थे और अभिभावकों से माफी मांगते हुए उनकी फीस वापस करने की बात कही थी लेकिन नोएडा, मेरठ और दिल्ली के पब्लिशर्स की महंगी किताबें उनके यहां चलाई जा रही है, उस पर वह चुप्पी साधे हुए हैं। दरअसल यह सभी किताबें एनसीईआरटी में 50 से लेकर 100 रूपए में मिल जाती है लेकिन दिल्ली के इन पब्लिकेशन में 700 से 1000 रुपए तक की मिलती है, ऐसे में स्कूल मालिक मोटा कमीशन खाते हैं। और यह पूरा वसूली का गैंग चलता है, जिसमें प्रेम सिंह जैसे पत्रकार का ब्राइट वे स्कूल भी शामिल है। अब इसमें जानकीपुरम शाखा के अभिभावकों की हिम्मत सामने आई है, बाकी के ब्रांच के अभिभावक अभी डरे हुए हैं, ऐसे में वहां का घोटाला दबा हुआ है।

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